मंगलवार, 9 अगस्त 2011

आरक्षण में विसंगतियां पार्ट 4 ; कहाँ गयीं यूपी की विमुक्त एवं घूमंतू जातियां ?

अनुसूचित जाति,  अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़े वर्गों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के आरक्षण के हो हल्ले में शायद ही किसी को उत्तर प्रदेश की विमुक्त जातियों एवं घूमंतू जातियों की सुध रही हो | नई पीढ़ी को तो शायद समझने में समय भी लगे कि ये क्या बला है ?  
जैसा कि भारत की जन गणना 1961 उत्तर प्रदेश के सन्दर्भ में , में स्पष्ट उल्लिखित है कि-
 उत्तर प्रदेश की बंजारा ,भर , दलेरे, कहार,  केवट , मल्लाह, लोध, मेवाती, औधिया और तगाभाट जातियां अपने नाम के सामने वर्णित जनपदों में विमुक्त जाति( एक ही स्थान पर निवास करने वाली ) घोषित हैं|
इसी प्रकार खुरपलटा, मोंगिया (मोंग), मदारी, सिंगीवाला, औघड़, बैस, भाट, चमरमंगता, जोगी, जोगा, किगिरिया, महावत (लुंगी पठान), भडरी, सपेरा (सपेरिया), कर मंगिया हिन्दू (महावत) और बेलदार जातियां अपने नाम के सामने वर्णित जनपदों में घूमंतू जाति घोषित हैं| ये शासनादेश सं-  ए / 700(5)-1959, दिनांक 12 मई 1961 तद संशोधन शासनादेश सं- 1276/ 26-3-92-3(42)-90, दिनांक 28 नवम्बर 1992, के अनुसार घोषित हैं |                     विसंगति ये है कि उत्तर प्रदेश में इनमे से कुछ को विमुक्त एवं घूमन्तु घोषित होने के बावजूद जबरदस्ती पिछड़े वर्ग का जाति प्रमाण पत्र पकड़ा दिया जाता है | जब कि नियमानुसार सम्बंधित जनपदों में विमुक्त एवं घूमंतू जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाना चाहिए | शेष जातियों का आज तक पता ही नहीं चल सका कि वो गयीं कहाँ ? न GEN/SC/ST/OBC  की सूची में ही रहीं | ऐसा यदि जानबूझ कर किया जा रहा है तो स्पष्ट होना चाहिए कि किन लोगों को फायदा पहुँचाने की नीयत से वास्तव में ऐसा अन्याय किया जा रहा है ?
    ये अन्याय उच्च न्यायालय के आदेश की उस भावना के सर्वथा प्रतिकूल है जिसमे स्पष्ट किया गया है कि विमुक्त जातियां अनुसूचित जनजातियों में समझी जाएँगी | AIR 1983 P&H 230(232)


सोमवार, 1 अगस्त 2011

आरक्षण की इस घोर विसंगति का क्या कारण है ?

कोई ज्ञानी पुरुष यदि जानकारी रखता हो तो बताने की कृपा करे|

1-दिल्ली का मोची जाति का व्यक्ति यूपी माइग्रेट होने पर किस जाति में गिना जायेगा ? जबकि यूपी में मोची जाति पिछड़ी में है |
2-यदि कोई मुस्लिम धोबी धर्म परिवर्तन कर हिन्दू बन जाता है तो वो धोबी जाति का कौन सा प्रमाणपत्र लेगा SC का या BC का और क्यों ?

3-यूपी की SC की सूची में एक ही जाति के नाम के आगे चार चार पर्यायवाची या उपजातियों का व्यौरा क्यों ?
4-पंजाब के आदि धर्मी या सिकलीगर जाति के लोग यूपी माइग्रेट होने पर किस जाति का प्रमाण पत्र यूपी सरकार से लेंगे क्योंकि दोनों में से कोई भी जाति यूपी की SC/BC/ST सूची में नहीं है | या फिर अपना जाति प्रमाण पत्र लेने पंजाब दौड़ लगायेंगे | और अगर पंजाब से ले भी आये तो क्या यूपी सरकार ...उसे मानेगी ? या इन्हें General घोषित कर कर देगी ?

5-मध्य प्रदेश का कुम्हार जाति का व्यक्ति जो SC में आता है ,यूपी माइग्रेट होने पर क्या माना जायेगा ?

6-गोंड जाति यूपी के १३ जनपदों में ST है , शेष यूपी में SC क्यों ?

7-गोंड जाति के ST प्रमाण पत्र पर कोई व्यक्ति आगरा में भर्ती तो हो सकता लेकिन अपने बच्चों के ST प्रमाण पत्र आगरा से नहीं ले सकता| पहले तो जारी ही नहीं होंगे और पिता के प्रमाण पत्र के आधार पर जारी हुए तो SC के | ये क्या मजाक है ?

8-दिल्ली राज्य का निवासी यूपी का मुख्यमंत्री कैसे बन सकता है ?
9 -जमुना नदी के उस पार का भू भाग जो दिल्ली प्रदेश में आता है, वहां का मल्लाह मछुआ समुदाय अनुसूचित जाति में सूची बद्ध है और वह क्षेत्र जो उत्तर प्रदेश में आता है यानि आगरा एवं गाजिआबाद जिले का मल्लाह विमुक्त जाति में | 
          जब कि यूपी के शेष जिलों का मल्लाह अन्य पिछड़ा वर्ग में | आरक्षण की इस घोर विसंगति का क्या कारण है ?
ये मनगढ़ंत सवाल नहीं, बल्कि तमाचा हैं उन लोगों के मुंह पर, जो समता मूलक समाज और भाईचारा बनाओ कमेटी बना कर लोगों को उल्लू बना रहे हैं |

रविवार, 31 जुलाई 2011

सुब्रमण्यम स्वामी का मानसिक दिवालियापन

हाल में मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट के तीन दिन बाद मुंबई के एक अंग्रेजी अखबार में छपे लेख में पूर्व केंद्रीयमंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने सुझाया है कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए और यहां गैर हिंदुओं से वोट देने का अधिकार छीन लेना चाहिए। उन्होंने कहा है कि मुस्लिमों या अन्या गैर हिंदू समुदाय के लोगों को वोट देने का अधिकार तभी होना चाहिए जब वे गर्व से यह बात मानें कि उनके पूर्व हिंदू थे। इस्लामी आतंकवाद से निपटने के अपने तरीके सुझाते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने ये बातें कहीं। 
समाजवादी पार्टी सुब्रमण्यम स्वामी के इस बयान की घोर निंदा करते हुए इसे राष्ट्रद्रोह मानती है और मुस्लिम और अन्य गैर हिंदुओं से वोट देने का अधिकार छीन लेने की वकालत करने वाले लेख पर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करती है।
                            आये दिन टीवी पर मुंह फाड़ते नज़र आने वाले कांग्रेसी नेताओं ने स्वामी के इस बयान की आलोचना तो दूर, इस पर प्रतिक्रिया तक नहीं दी है | ताज्जुब ये है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने स्वामी के इस बयान का संज्ञान तक नहीं लिया है  कि उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।

सोमवार, 25 जुलाई 2011

वीरांगना फूलन देवी को पुण्य तिथि पर शत-शत नमन


कमज़ोर, वंचित एवं उपेक्षित मछुआ समुदाय की मसीहा बहन वीरांगना फूलन देवी को 10वीं पुण्य तिथि पर शत-शत नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि |
मछुआ समुदाय आपके संघर्ष से प्रेरित हो कर अपने सामाजिक , शैक्षिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक विकास की दिशा में आपके मार्गदर्शी सुझावों पर कार्य करता रहेगा और मछुआ आरक्षण के आपके अधूरे सपने को साकार करने के लिए अपने प्राण-प्रण से जुटा रहेगा | सामाजिक क्रांति के इस अंतिम मोर्चे पर आपका अभाव निःसंदेह पीड़ा दायक तो है किन्तु आपकी संघर्ष गाथा हमारे लिए ऊर्जा स्रोत बनकर सामने भी है |
               मछुआ समुदाय आपके सुझाये मार्ग पर चलने को संकल्परत है |

रविवार, 24 जुलाई 2011

सच्चा अम्बेडकरवादी वही जो समाजवादी

सच्चा समाजवादी कभी भी आरक्षण विरोधी नहीं हो सकता और सच्चा अम्बेडकरवादी समाजवादी न हो, ये हो ही नहीं सकता | क्योंकि समाजवादी व्यवस्था ने कमजोरों के लिए विशेष अवसरों की सदैव वकालत की है | जिसे कानून ने आरक्षण का नाम दिया है | लेकिन जो लोग इसी आरक्षण के सहारे आगे बढ़ गए और अपनी आजीविकाओं में परिवर्तन ले आये , इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि समाजवाद के खिलाफ वो लोग ही सबसे पहले आस्तीनें चढ़ाये घूम रहे हैं और दूसरों के आरक्षण का विरोध करते फिर रहे हैं | ये न सिर्फ मानवता के विरुद्ध है बल्कि उस अम्बेडकरवाद के भी खिलाफ है, जिसके वो अलमबरदार, सिपहसालार और तरफदार बन रहे हैं | इन छद्म अम्बेडकरवादियों को आरक्षण विरोध शोभा नहीं देता है | उनका ये विरोध डाल पर बैठ कर डाल को काटने जैसा ही है | अम्बेडकरवाद की बुनियाद समाजवाद ही तो है |इसलिए आवश्यकता समाजवाद के पोषण, संवर्धन और संरक्षण की है, न कि इसे कमज़ोर करने की | समाजवाद के कमज़ोर होने का तात्पर्य है पूंजीवाद का शक्तिशाली हो जाना | पूंजीवादी व्यवस्था में लंगोटी वाला कमाता है और धोती वाला खाता है| दलितों ,पिछड़ों और अल्संख्यकों का हित समाजवाद के आरोहण में है |

आइये भारत में समाजवादी समाज की स्थापना के डा लोहिया और डॉ अम्बेडकर के सपने को साकार करें |

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

आये कुत्ते खा गए, तू बैठी ढोल बजा

खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चलाय,|
आये कुत्ते खा गए, तू बैठी ढोल बजाय || 
संभवतः 800 वर्ष पूर्व अमीर खुसरो द्वारा कहे गए इस दोहे में आज की उत्तर प्रदेश की राजनीति स्पष्तः द्रष्टिगोचर हो रही है |  मायावती जी सर्वजन राग गा रही हैं और दलित विरोधी नाच रहे हैं | अब मस्ती में डूब कर गाने वाले की आँखें बंद हो जाना स्वाभाविक ही है | इसलिए प्रदेश में बदती दलित उत्पीडन की घटनाओं से सरकार का कोई लेना देना नहीं रह गया है | 
जैसे ग़ज़ल गायकी खुले मंचों की शोभा से फिसल कर ऑडिटोरियम से होती हुयी पञ्च सितारा होटलों के रास्ते से गुज़र कर अब भव्य ड्राइंग रूमों की दासी बन बैठी है , वैसे ही दलित शोषित समाज की राजनीति DS4 ,बामसेफ और बहुजन के रास्ते होती हुई अब सर्वजन पर आकर अटक गयी है | जैसे भव्य ड्राइंग रूमों में अधलेटे , मसनदों पर औंधे पड़े  एवं शेष शैय्या धारी विष्णु की विश्राम मुद्रा में ग़ज़ल सुनने वालों को ग़ज़ल की A B C D भी पता नहीं होती, उनकी नज़र गाने वाले / वाली के लिवास व मेक अप पर ही रहती है और वे सिर्फ ताल का आनंद लेने आये होते हैं , उसी प्रकार सर्वजन की राज नीति करने वालों को दलितों की समस्याओं और उनके सामाजिक सरोकारों,  शिक्षा , विकास  ,उनके बढते उत्पीडन से कोई मतलब नहीं रह गया है  , ये तो केवल येन केन प्रकारेण सत्ता पाने के लिए लालायित हैं | 
बाबा साहेब ने जीवन भर जिस व्यवस्था से संघर्ष किया आज मायावती जी उन्ही से समझौता करके निसंदेह अम्बेडकर वादियों  का अपमान ही कर रहीं हैं | जिसके साथ संघर्ष ठहरा , उससे समझौता कैसा ?
दलित उत्पीडन के सारे रिकार्ड, दलित हितों का दिखावा करने वाली बसपा सरकार में टूट गए हैं | दलित अधिकारी कर्मचारी जितना बसपा सरकार में परेशान हुए हैं, उतना कभी नहीं रहे | शर्म आती है कहने में ,लेकिन कड़वा सच है कि दलित महिलाओं के सर्वाधिक शील भंग इसी सरकार में हुए , कई में तो बसपा विधायक नामज़द हैं | ये अनु०जाति / जनजाति आयोग की रिपोर्ट बताती है | एक जातिवादी मानसिकता रखकर बसपा सरकार दलितों में ही विभाजन की प्रष्ठ भूमि तैयार किये जा रही हैं | दलितों में ही एक तबका बना जा रहा है जो सत्ता के बावजूद कमज़ोर है, योजनाओं के बावजूद पीड़ित है, आरक्षण के बावजूद वंचित है, सामाजिक न्याय के बावजूद शोषित है और दलितों की ही सरकार में बहिष्कृत है |  एक न एक दिन ये सर्वहारा और वंचित वर्ग अपने अधिकारों के लिए दलितों के ही मुकाबले आ जायेगा |
ऐसा नहीं कि मुख्य मंत्री को बढते दलित उत्पीडन की जानकारी नहीं होगी , मगर जो लोग जन्मदिन का मोटा चंदा दिए बैठे हैं, उन्हें कहीं तो सहूलियत दी जाएगी ..........

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

ज़मीनी हकीकत जाने बिना किस काम के राहुली दौरे ?

मित्रो,
राहुल फिर यूपी की यात्रा पर हैं | कांग्रेसी गदगद हैं कि युवराज का अनुभव बढ़ रहा है | भारत में रोड शो की जननी कांग्रेस
यूपी में चमत्कार की आस में बेकार ही जोर लगाये जा रही है | बसपाई गुंडों से जनता वैसे ही परेशान है | अपराध प्रदेश / बलात्कार प्रदेश  में जीना मुहाल है | रोजी रोटी की जद्दोजहद में कांग्रेसी उत्पाद ताबड़ तोड़ महंगाई बचा खुचा चैन-सुकून भी छीने डालती है | ऊपर से राहुल की मेहमान नवाजी, वो भी 30 -35 पुलिस वालों के साथ | पूरी बारात का खर्चा है भाई | कुछ राहत दी हो तो कोई साहस भी जुटाए | गरीब आदमी पिंड छुड़ाने को हाँ में हाँ तो मिलाएगा ही, कि अच्छा है जल्दी रवानगी डालें | लेकिन ये क्या आपने तो गोद में बच्चा उठा लिया | दनादन फोटो सेशन होने लगा | मीडियाई धमाचौकड़ी में गाँव वालों की समस्यों पर जींस चढ़ाये महिला पत्रकारों के अंग्रेजी सवाल और राहुल के अहमद पटेल्वी जवाब | पीपली लाइव की तर्ज़ पर बगलें झांकते गाँव वाले |
दर असल रोड शो का सही हिंदी रूपांतर "तमाशा" है जो कांग्रेस कर रही है | ज़मीनी हकीकत से दूर कांग्रेस जन समस्याओं को आज भी नहीं समझ पाई है | चुनाव जीतना तो दूर कांग्रेस प्रत्याशी तक तय नहीं कर पा रही | जनता के सरोकारों से दूर रहने वाले ड्राइंग रूम पालिटिक्स के माहिर कांग्रेसी मसनदी नेता अपने युवराज से करिश्माई कद की आस लगाये बैठे है , लेकिन जिनकी आस को कांग्रेसी मंहगाई ने हमेशा के लिए तोड़ डाला है वो किससे फ़रियाद करें |
बेहतर होगा कि कांग्रेस जनता के रुख को समझे और जन भावनाओं के विपरीत जाने का साहस कदापि न करे क्योंकि भय, भूख, लाचारी, बेकारी , अपराध, भ्रष्टाचार, अन्याय और घोर जातिवाद में त्राहि त्राहि कर रहा आम जनमानस स्पष्ट रूप से सत्ता परिवर्तन का मन बना चुका है और मायावी कुशासन से मुक्ति के लिए समाजवाद में ही अपना भविष्य ढूँढ रहा है |