शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

योगी जी के दौरे से बुंदेले निराश

प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ के झांसी दौरे से प्यासे बुन्देलखण्डी ठगा सा महसूस कर रहे हैं। योगी जी के आगमन से जनमानस आशान्वित था कि प्यासी बुन्देली धरा को कोई बड़ी जलपरियोजना का तोहफ़ा जरूर मिलेगा किन्तु चित्रकूट एवं झाँसी मंडलों के जनपद वासियों को उस समय घोर निराशा हाथ लगी जब मुख्यमंत्री जी ने जलसमस्या से निबटने के लिए दो साल का वक़्त माँगा।
प्यासे पशु चारे की कमी से बेमौत मर रहे हैं। गौ रक्षक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। तालाब गर्मी की शुरुआत में ही खाली हो चुक हैं। पशुओं के लिए बनाये गए चारा केंद्र सूने पड़े हैं।
मैंने मार्च माह में बुन्देलखण्ड की समस्याओं को लेकर राज्यसभा में संकल्प के जरिये आवाज़ उठाई थी किन्तु एक भी बुन्देली सांसद ने लोकसभा में उक्त मांगो को तवज्जो नहीं दी। केंद्र सरकार मेरी मांग के अनुरूप छोटे छोटे चैक डैम ग्राम सभाओं में बनवाये और इसके लिये चौदहवें वित्त आयोग की धनराशि अतिरिक्त बढ़ाये। साथ ही नलकूप अनुदान की राशि दोगुनी करते हुए शासकीय नलकूपों की संख्या बढ़ाये ।
प्यासे तन और मन को सड़क से नही, संकल्प से जोड़िये। दिल्ली आगरा झांसी तो पहले से ही फोरलेन स्वर्णिम चतुर्भुज से जुड़ा है। उन्हें सड़क नहीं पानी चाहिए , दो साल बहुत ज्यादा हैं जो आपने मांगे हैं।

सोमवार, 26 दिसंबर 2016

बसपा भाजपा नहीं चाहती थीं 17 जातियों को आरक्षण, लेकिन CM अखिलेश ने कर दिखाया

लखनऊ । समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सपा के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि 22 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश की सरकार की कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से 17 जातियों ( केवट, मल्लाह, निषाद, कहार, कश्यप, धीवर, धीमर, बाथम, कुम्हार, प्रजापति, भर, राजभर, मछुआ, गोड़िया, मांझी, बिन्द, तुरहा ) जातियों को अनुसूचित जाति में परिभाषित करने के लिए प्रस्ताव पास कर इन जातियों को उनका हक दिलाने का काम किया है। इसके बाद अब प्रदेश में अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए शासनादेश जारी किया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले से 17 जातियों के लोग मुख्यमन्त्री की जमकर तारीफ कर रहे हैं। हम मुख्यमंत्री को इस कदम के लिये हार्दिक बधाई देते हैं और उनका आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि सीएम अखिलेश यादव ने एक फैसले से तकरीबन एक करोड़ से अधिक लोगों को अपना मुरीद बना लिया है, जो अपने इस यशस्वी नेता को दोबारा सीएम बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इन सामाजिक रूप से पिछड़ी जातियों को आरक्षण की व्यवस्था देकर समाज के भविष्य को बदलने का काम किया है। जबकि वहीं बसपा ने 2007 में इस जारी शासनादेश को निरस्त करने काम किया। इतना ही नहीं बसपा ने इस आरक्षण को निरस्त करके केन्द्र से प्रस्ताव वापस मंगा कर यह साबित कर दिया कि वह केवट, बिन्द, मल्लाह, कुम्हार, राजभर की सबसे बडी दुश्मन हैं। बसपा ने हमेशा इन जातियों को धोखा देने का काम किया है। 

वहीं दूसरी तरफ जब मुख्यमंत्री ने वर्तमान सरकार में कई बार प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा तो भाजपा की मोदी सरकार ने वापस करने का काम किया। इससे मोदी सरकार ने यह सिद्ध कर दिया कि यह 17 जातियों के आरक्षण के घोर विरोधी हैं। इसलिए आज पूरे हिन्दुस्तान में राजभर, केवट, बिन्द, मल्लाह आदि 17 जातियों के मसीहा मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं। उन्होंने आरक्षण का लाभ देकर साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री की कथनी व करनी में कोई अन्तर नहीं है । 17 जातियों के लोग इस फैसले से खुश होकर यह संकल्प लेकर निकलेंगे कि 2017 के चुनाव में मुख्यमंत्री को पुनः बहुमत देकर मुख्यमंत्री बनाने का काम करेंगे।
उन्होंने  इन 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने पर मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए कहा  कि आजादी के बाद न्यायोचित अधिकार देकर मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक फैसला लेने का काम किया है। इस दौरान व्यास जी गोंड, डॉ अच्छे लाल निषाद, पप्पू लाल निषाद, रामदुलार राजभर,  रामपाल प्रजापति, विजय कश्यप, कुलदीप तुरैहा, कमल तुरैहा, दिलीप रैकवार आदि उपस्थित थे।

बुधवार, 15 जून 2016

कैराना का संघी सच

घटनाओ को सांप्रदायिक रंग देकर उनपर राजनीति करने में भाजपा सिद्धहस्त रही है । सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बूते वोटों की क्षुद्र राजनीति खेलना और समाज में तनाव फैलाकर उन्मादी सियासत करना भाजपा और उसकी संघी जमात का बाएं हाथ का खेल रहा है ।
मुज़फ्फरनगर दंगों के बूते 2014 फ़तेह करनी वाली भाजपा अब कैराना के जरिये उत्तर प्रदेश में सत्ता प्राप्ति का ख्वाब देख रही है । भाजपा के वरिष्ठ कहे जाने वाले गुर्जर नेता श्री हुकुम सिंह जी आजकल सूची सूची खेल रहे हैं । फर्जी और मनगढ़ंत सूचियों के जरिये भाजपा नेता यह साबित करना चाहते हैं कि यूपी के कैराना क़स्बे में निवासरत हिन्दू समुदाय के लोग कैराना के मुस्लिम भाइयों के आतंक से परेशान होकर शहर छोड़कर भाग रहे है। हद तो ये है कि पलायन के अलावा भाजपा नेता सनसनी फैलाने के लिए क्षेत्र के विभिन्न आपराधिक घटनाओं में मार दिए गए हिन्दू लोगों की सूची भी बना रहे हैं ताकि उनकी हत्या के लिए दूसरे सम्प्रदाय के लोगों  को दोषी ठहरा कर तथा लोगों में भय फैलाकर वोटों की तुच्छ राजनीति कर सकें | कैराना की तुलना कश्मीर से करने को उतावले भाजपा नेता दरअसल अपनी बेटी को कैराना से विधायक बनवाना चाहते हैं | इन सारे आरोपों को लगाने वाले भाजपा नेता खुद कैराना से दशको से विधायक और वर्तमान सांसद भी हैं यह पलायन उनकी नाक के नीचे दशकों से होता रहा और सांसद जी की नींद 2017 नजदीक देखकर यूँही नहीं टूटी |
पुलिस जांच में भाजपा नेता की दोनों सूचियाँ फर्जी साबित हो चुकी है |
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1-पहली सूची में वर्णित अनेक परिवार दशकों पहले कैराना छोड़कर मुंबई दिल्ली शिफ्ट हो गए हैं , पांच साल पहले कई परिवार रोजगार की तलाश में दिल्ली चले गए जबकि भाजपा नेता इसकी वजह साम्प्रदायिक बताते नहीं थक रहे | दिल्ली एनसीआर में बेहतर रोजगार साधन होने के कारण पश्चिम यूपी के निवासियों का दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्र में बस जाना आम बात है | यह सिलसिला 60 के दशक आरम्भ हुआ और आज भी अनवरत जारी है | रोजगार के लिए हिन्दू ही क्यूँ , अनेक मुस्लिम भाई खाड़ी के देशों तक में जा बसे हैं | जिसको किसी धार्मिक द्रष्टि से देखा जाना कतई अनुचित है |
2-भाजपा नेता की दूसरी सूची उन हिन्दू व्यवसायियों की है जिनकी हत्या पिछले एक दशक में की जा चुकी है | सूची प्रकाशित करने के पीछे भाजपा नेता का शातिर दिमाग यह सोचकर काम कर रहा है ताकि इसके जरिये लोगों को उकसाया जा सके कि एक धर्म के व्यवसाइयों की हत्याएं हो रही है | जबकि हकीकत यह है कि पुलिसिया रिकार्ड में इन हत्याओं में वांछित लोग हिन्दू ही हैं कई में तो मृतकों के रिश्तेदार दोषी सिद्ध हुए |
ऐसा नहीं है कि भाजपा नेता इस असलियत से वाकिफ नहीं है बल्कि वे सब कुछ जानते हुए भी तथ्य छुपा कर इस सूची  पर धार्मिक राजनीतिकरण कर उन्माद की नीवं पर कैराना के जरिये एक और मुज़फ्फरनगर देखना चाहते हैं | हैरत ये है कि मीडिया भी  बिना किसी पड़ताल के ऐसी ख़बरें दिखाकर सामाजिक एकता के ताने बाने को कुतरने की संघी साजिश में लगा हुआ है 

बुधवार, 18 मई 2016

हार्दिक आभार एवं धन्यवाद

प्रिय मित्रों !
आप सब सामाजिक बन्धु बांधव एवं ईष्ट मित्रगण के शुभाशीष एवं मंगलकामनाओं से मेरा राज्यसभा हेतु समाजवादी पार्टी ने नामांकन सुनिश्चित किया है |
मेरा राज्यसभा में चयन इस बात को प्रमाणित करता है कि समाज और जमीन से जुड़े मजबूत कार्यकर्ता की मेहनत की कद्र पार्टी नेतृत्व ने सदैव की है और उसे माननीय मुलायम सिंह यादव जी ने आगे बढ़कर उस कार्यकर्ता को और तराशा है , निखारा है और सम्मानित किया है ।
राज्यसभा में पुनः नामांकित करने के लिए सपा नेतृत्व का हार्दिक धन्यवाद । 
आदरणीय नेताजी सच्चे कार्यकर्ता की मेहनत को जौहरी की भांति पहचानने में भूल नहीं करते ।
लोकसभा चुनाव में नेतृत्व विहीन हो चुके मछुआ समुदाय को, जो कि सामाजिक मुख्यधारा में आने के लिए आज भी हाथ पैर मार रहा है , देश की संसद में समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व देकर माननीय मुलायम सिंह जी ने हमें आवाज़ देने का अवसर प्रदान किया है । अब निसंदेह ही हम अपनी 17 अति पिछड़ी जातियों की आवाज़ को संसद में उठाने के लिए दूसरों के मोहताज़ नहीं रहेंगे और अपने SC आरक्षण पर और अधिक प्रखर और मुखर होकर बात रखेंगे। समाजवादी पार्टी अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को संरक्षण देकर उसके चेहरे पर मुस्कान लाने को कटिबद्ध है ।
मुझे बेहद ख़ुशी है कि मेरे  साथियों ने मेरे लिए बहुत दुआएं की और उनका प्यार और आशीर्वाद मेरे लिए शुभ समाचार लाया |
पुनश्च सभी का आभार एवं धन्यवाद
आप सबकी शुभकामना का सतत आकांक्षी


विशम्भर प्रसाद निषाद
सांसद / राष्ट्रीय महासचिव
समाजवादी पार्टी

सोमवार, 16 मई 2016

विचार जगाओ , नेतृत्व अपने आप पैदा होगा

आदरणीय बाबू मनोहर लाल जी, बाबू जयपाल सिंह कश्यप और बहन फूलन देवी जी की एकमात्र थाती यही थी कि उन्होंने समाज को उर्वरा सोच दी | व्यक्तिगत पूंजी जुटाए बिना उन्होंने लगातार सामाजिक पूंजी का संचयन किया और सामाजिक धरोहर बनकर समाज को दिशा देने का अविस्मरणीय कार्य किया | मैं स्वयं को इन्ही महापुरुषों के महान संघर्षों से उपजा एक साधारण कार्यकर्ता समझता हूँ जिसने निषादों के लिए सख्त और बंजर समझे जाने वाली बुन्देलखंडी धरा पर अपने सामाजिक विचार को धार देने की अनथक कोशिश की और आज भी उसी संकल्प के साथ अनवरत जुटा हूँ | जब मैंने 1989 में राजनीति में आने का फैसला किया तो क्षेत्र के जातीय मठाधीश कहे जाने वाले ठाकुर पंडितों की हंसी छूट गयी थी | निषादों की नेतागिरी उपहास का पात्र ठहरा दी गयी, लेकिन जब सदियों से वंचित और उपेक्षित समाज को सामाजिक न्याय का ठौर मिला तो निषाद मत राजनीति में एकाएक निर्णायक समझे जाने लगे | हाशिये पर पड़ा बहिष्कृत समाज अब बुन्देलखंडी सियासत की धुरी बन गया था | अब हमारे लोगों को जिताने और हराने के हिसाब से टिकट दिए जाने लगे | यह युवाओं की कड़ी मेहनत और जज्बे का उछाल था जिसने मुझे 29 वर्ष की आयु में विधानसभा और 32 वें वर्ष की आयु में संसद की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया बदलते वक़्त में मछुआ आरक्षण आन्दोलन को निषाद युवाओं ने अपनी आवश्यकता समझा और अपनी अस्मिता मान सम्मान और आस्तित्व से जोड़कर इसे व्यापक रूप दिया | आज समाज का युवा स्वतंत्र सोच रखता है , वह अपने अधिकार के लिए ढकोसलों पाखण्ड और भेदभाव के चक्रव्यूह को तोड़ने को आतुर दिखाई देता है तो सत्ता में बैठे निरंकुश सांसद विधायकों और मंत्रियों की आलोचना से भी नहीं हिचकता है | यह बदलाव भी इन्ही दस पंद्रह वर्षों में द्रष्टिगोचर हुआ है जिसने हमारे युवाओं को न सिर्फ विचारशील बनांया बल्कि उनमे सामाजिक सोच उभारते हुए बुजुर्गों के संघर्षों को आदर्श बनाकर नए जीवन पथ गड़ने / चुनने के लिए प्रेरित किया और राजनीति में नए अवसर पैदा किये निषाद समाज में आज सहारनपुर से लेकर बलिया तक और ललितपुर से लखीमपुरखीरी तक संघर्षशील चरित्र के धनी युवाओं की भरमार है | उत्तर प्रदेश ही नहीं, बिहार बंगाल उत्तराखंड पंजाब हरियाणा महाराष्ट्र से लेकर गुजरात ओड़िसा के समुद्री तटों तक निषाद युवा आज करवट ले रहा है तथा हर परिस्थिति और बदलाव पर पैनी नज़र रखे हुए हैं, कम से कम अनभिज्ञ तो कतई नहीं
वो मुतमईन है पत्थर पिघल नहीं सकता मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिए

बुधवार, 22 जुलाई 2015

मछुआ संघर्षों का पर्याय : जुलाई माह


 यूँ तो 10 जुलाई सरकारी तौर पर मछुआ दिवस के रूप में प्रचलित है लेकिन अधिकार विहीन उद्वेलित मछुआ समाज ने जून से आरम्भ हुए संघर्ष के बाद जुलाई में अपने आन्दोलनों को पैना करने में कोई कोर कसर नहीं उठा छोड़ी।
उत्तर प्रदेश, बिहार और मप्र का सम्पूर्ण मछुआ समाज आज करवट ले रहा है।
बिहार में अब तक सत्ता की लड़ाई से बाहर रहे और मूक दर्शक की भूमिका निभाने वाले मछुआ समुदाय ने इस बार कमर कसते हुए अब तक के सबसे बड़े संघर्ष का शंखनाद राजधानी पटना से किया है । बिहार विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए बिहार की निषाद, केवट, साहनी, मल्लाह, नोनिया, बिन्द, बेलदार, चंद्रवंशी कहार, रावनी ,रमानी और तुरहा जातियों के लोग आस्तित्व की लड़ाई को तेज कर राजनैतिक प्रतिनिधित्व के लिए संगठित होकर संघर्ष कर रहे हैं । राजनैतिक दलों के लिए नफे नुकसान का बायस बनी इन जातियों के लोग आरक्षण की लड़ाई के साथ सत्ता में पर्याप्त प्रतिनिधित्व भी राजनैतिक दलों से सुनिश्चित करा लेना चाहते हैं । जातीय राजनीती का गढ़ रहा बिहार इस दफा यादव मुस्लिम दलित समीकरण के साथ साथ मछुआ समीकरण से भी पहली बार प्रभावित होने जा रहा है । जुलाई माह में इस दिशा में सम्बंधित पक्षों ने जमकर मेहनत की है जिसका सकारात्मक परिणाम अभी से नज़र आने लगा है ।
वहीँ उप्र के मछुआ समुदाय के लोग केंद्र की मोदी सरकार के निषाद विरोधी फैसलों के तहत 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने संबंधी उप्र सरकार के प्रस्ताव को निरस्त करने पर दिल्ली घेर कर संसद सत्र बाधित करने का ऐलान किये हुए है । 5 जुलाई को लखनऊ में आहूत तैयारी बैठक में उमड़े जनसैलाब ने एक विशाल आंदोलन की नींव रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब अधिकारों की लड़ाई में मछुआ समाज बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने से भी पीछे नहीं हटेगा । SC आरक्षण हमारी मांग नहीं, संकल्प है और इसके लिए भारतीय मछुआ महासंघ के कार्यकर्ता प्रदेश के जिलों की जमीन नापते हुए समाज को 29 जुलाई के लिए तैयार कर रहे हैं। आशा है एक ऐतिहासिक आंदोलन दिल्ली की सरजमीन पर आकार लेगा जिसके दूरगामी परिणाम परिलक्षित होंगे ।
आज 22 जुलाई 2015 से ही मप्र के सभी मांझी (भोई, कहार, ढिमर, केवट, मल्लाह, निषाद, बाथम, रायकवार, नावड़ा , तुराहा, सोंधिया, जलारी एवं मुड़ियारी आदि ) भाई अपने अनुसूचित जनजाति आरक्षण के अधिकार के लिए उज्जैन महाकाल की भूमि से भोज की धरती भोपाल तक पैदल मार्च कर मांझी अधिकारों के संघर्ष का बिगुल बजाने जा रहे हैं और प्रदेश की शिवराज सरकार के झूठे वायदों की पोल खोलते हुए मुख्यमंत्री निवास के समक्ष मुंडन करवा कर विरोध दर्ज़ करायेंगे। दांडी मार्च की याद दिलाने वाला मांझी भाइयों का ऐतिहासिक भोपाल मार्च मांझी संघर्ष के इतिहास में एक नए अध्याय का सूत्रपात करेगा ।
सामाजिक संगठनों के लिए आंदोलन छेड़ देना कोई नई बात नहीं । प्रायः अधिकारों की आवश्यकता महसूस करने वाले जन आधारित सामाजिक संगठन अपनी जमीनी पकड़ का एहसास कराते हुए गूंगी बहरी सरकारों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए आन्दोलनों का सहारा लेते हैं । लेकिन आश्चर्य और खेद का विषय है कि सम्पूर्ण उत्तर भारत का मछुआरा समाज अपने अधिकारों के लिए आंदोलित हैं और सरकारें उपेक्षा और तिरस्कार की हद किये डाल रही हैं। संविधान लागू हुए बेशक 65 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन आज भी लोग अपने मौलिक अधिकारों की सतत मांग कर रहे हैं और सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय का ढोल पीटने वाली निष्ठुर सरकारें मांगों पर विचार तक नहीं कर रहीं ।

मंगलवार, 14 जुलाई 2015

दिल्ली घेरने की आवश्यकता, कारण और महत्व


सर्वप्रथम 1931 से अछूत अस्पर्श्य और निचले पायदान पर समझे जाने वाली जातियों को अनुसूचित जाति घोषित करते हुए उनके सामाजिक आर्थिक संरक्षण के सरकारी संकल्प की घोषणा की गयी । जिसे संविधान लागू होते समय प्रेसीडेंशियल ऑर्डर 1950 में इसका प्रावधान कर सरकार ने ऐसे वंचित वर्गों के लिए विशेष सुविधा अनुमन्य की और उसे अनुसूचित जाति / जनजाति आरक्षण व्यवस्था का नाम दिया गया । संविधान अनुच्छेद  341 के तहत यह सुविधा केवल दस वर्षों के लिए ही लागू की गयी और इसके निर्धारण की समस्त शक्ति संसद में निहित की गयी थी । वर्ष 1931, तदुपरांत 1950 से ही भारत के अधिकाँश राज्यों में मछुआ समुदाय की किसी न किसी जाति को इस सूची में SC अथवा ST स्टेटस युक्त स्थान देकर इन जातियों के सामाजिक उत्थान की परिकल्पना की गयी ।

किन्तु दुर्भाग्यपूर्ण विषय रहा कि अनुसूचित जाति में उल्लिखित एक दो जातियों के बहुमत के कारण सरकार का यह प्रयास वोट बैंक की तुच्छ राजनीति का शिकार होकर रह गया और जातीय भाई भतीजावाद की भेंट चढ़ गया । SC आरक्षण में जातीय ठेकेदारी सर चढ़कर बोलने लगी और जातीय वोटबैंक की राजनीति से डरीं सरकारें 10 वर्षों के लिए घोषित इस पक्षपात पूर्ण व्यवस्था को अद्यतन ढो रही है ।
जाहिर है कि भाई भतीजावाद और जातीयता की भेंट चढ़ी इस आरक्षण प्रणाली से उन जातियों को कोई लाभ नहीं पहुंचा जो या तो वोट बैंक की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं थी अथवा अशिक्षित या अल्पशिक्षित थीं । दुर्भाग्य से देश की अनुसूचित जातियों की सूची में वर्णित मछुआ समुदाय की वे जातियाँ इसी संवैधानिक साजिश का शिकार बनायीं गयीं और नतीजतन उनके पर्यायवाची नामों को SC आरक्षण नहीं लेने दिया गया । 1961 में जहाँ चमार समूह की उपजातियों क्रमशः चमार, जाटव, धुसिया और झुसिया को उसके सम्मुख जोड़ा जा रहा था वहीँ अनुसूचित जाति /जनजाति सूची में वर्णित मछुआ समुदाय की जातियों की जेनेरिक कास्ट्स को बलपूर्वक पिछड़े वर्ग में ठूंसा जा रहा था, इतना ही नहीं भोले भाले मछुआ समुदाय के लोगों को SC / ST में आरक्षित होते हुए भी पिछड़ी जाति और विमुक्त जाति का प्रमाण पत्र लेने के लिए बाध्य किया जा रहा था । मछुआ जातियों का यह दुर्भाग्यनिर्धारण स्वयं को निचले तबके का मसीहा घोषित करने वाली कांग्रेस ने किया क्यूंकि कांग्रेस ने वंचित वर्गों के उत्थान का जिम्मा उनकी आरक्षण प्रणाली के भरोसे छोड़ अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली और जबकि असल में वहां साजिशन ठेकेदार और आरक्षण की लुटेरी प्रवृत्ति की जातियों का दबदबा हो गया ।
1989 में सामाजिक न्याय की अवधारणा समझते ही जब उत्तर प्रदेश के सत्ता से वंचित अतिपिछड़ों ने सत्ता परिवर्तनकर प्रदेश में सत्ता का पहली बार स्वाद चखा तो अहसास होते देर न लगी कि वास्तव में वंचित को वंचित बनाये रखने में कौन जिम्मेवार हैं ।
SC आरक्षण केंद्र सरकार की विषय वस्तु है । संविधान अनच्छेद 341 के प्रावधानों के अंतर्गत अनुसूचित जातियों की सूची सर्वप्रथम राष्ट्रपति आदेश 1950 द्वारा अधिसूचित की गयी थी जिसमे कोई भी संवर्धन, विलोपन या संशोधन संसद के अधिनियम द्वारा ही किया जा सकता है । अनुसूचित जातियों की सूची  में संशोधन के लिए भारत सरकार द्वारा कुछ प्रक्रियाएं निर्धारित की गयीं है जिसके अनुसार किसी जाति आदि को अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने के लिए सर्वप्रथम राज्य सरकार / संघ शासित क्षेत्र से आवश्यक नृजातीय सामग्री सहित प्रस्तावित होना अनिवार्य है जिसे भारत के महारजिस्ट्रार एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के परामर्श से प्रसंस्कृत किया जाता है । किन्तु उप्र की समाजवादी पार्टी की सरकार द्वारा संदर्भित जातियों के विषय में अनुसूचित जाति संशोधन प्रस्ताव भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप होने के बावजूद भी हर बार टाल दिया जाता है। दुर्भाग्य से ऐसा लगातार 5 बार से हो रहा है जो निश्चित ही इन जातियों के साथ साजिश , धोखा और षड्यंत्र है । 
गृह मंत्रालय ने 5/10 1979 से 23 /5 1981 के बीच में माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद भैयाराम मुंडा बनाम अनिरुद्ध पटार (ए०आई०आर० 1971 एससी 2533 )  के आलोक में आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक एवं ओडिशा के संबन्ध में कुछ जातियों को सूचीबद्ध जाति के नाम से निर्गत करने के कार्यकारी आदेश जारी किये थे, किन्तु इसमें भी साजिशकर्ता दबंग और ठेकेदार जातियों की दूषित मनोवृत्ति के कारण उत्तरप्रदेश की जातियों गोंड, तुरैहा, खरबार, मझवार और बेलदार के पर्यायवाची /जेनेरिक नामों को जोड़ने से छल/बलपूर्वक छोड़ दिया गया था । बाद में माननीय उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के महाराष्ट्र राज्य बनाम मिलिंद के वाद के बाद निर्णय विधि को चतुराई और भाईभतीजावाद के कारण बदल दिया गया ।
अब माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की आड़ में स्पष्ट कर दिया गया कि संविधान के अनुच्छेद 341 (1) के प्रावधानों के तहत जारी राष्ट्रपति आदेशों में संशोधन का अधिकार किसी न्यायालय, ट्रिब्यूनल या राज्य सरकार को नहीं है और माननीय उच्चतम न्यायायालय ने पूर्व निर्णीत भैयाराम मुंडा बनाम अनिरुद्ध पटार (ए०आई०आर० 1971 एससी 2533 ) में दिए अपने निर्णय को उलटते हुए संशोधन का अधिकार संसद में अंतिम रूप से निहित कर दिया ।
ऐसी विषम और चातुर्यपूर्ण परिस्थितियाँ पैदा की गयीं कि
1-कोई अन्य जाति बिना केंद्र की मर्जी के अनुसूचित जाति कोटे में घुस नहीं सकती, ……इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
2-भाजपा ने अपने यूपी विधानसभा चुनाव घोषणापत्र 2012  में समाज से वायदा किया कि मछुआ समुदाय की जातियों को SC घोषित करवाया जायेगा और उस वादे की आड़ में 47 विधायक जिता लिये गए और केंद्र में बैठकर आज भाजपा इन जातियों के औचित्य पर RGI से प्रश्नचिन्ह लगवाती है.…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
3- नौ लोकसभा और दो राज्यसभा अर्थात कुल 11 भाजपा मछुआ सांसद समाज की दशकों पुरानी मांग से मुंह मोडे बैठे है …… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
4- लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने वाराणसी में गंगा और गंगापुत्रों की दुर्दशा पर लम्बे लम्बे व्याख्यान दिए थे आज उन व्याख्यानों पर समाज स्पष्टीकरण चाहता है …… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
5- पूरे भारत का मछुआ समुदाय, चाहे वह महाराष्ट्र गुजरात का कोली हो, बंगाल का केउट, झालो मालो हो, या ओडिशा का ढेबर, धीबरा, कैबर्ता हो, आंध्रप्रदेश का गंगापुत्र हो या  मप्र, छत्तीसगढ़ का मांझी, केवट, ढीमर, मुड़ियारी, तुराहा, नावड़ा, जलारी अथवा सोंधिया हो, दिल्ली राज्य का मल्लाह हो अथवा यूपी उत्तराखंड का गोंड, तुरैहा, खरबार, मझवार, बेलदार, निषाद, केवट, मल्लाह, गौड़, गोंडिया,, रैकवार, बाथम, मांझी, कश्यप, कहार, धुरिया, गुड़िया या बिंद हो, आज आरक्षण की घोर विसंगति से वर्षों से जूझ रहा है… …इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
6- केंद्र को बताना होगा कि पैसठ वर्ष के आरक्षण में हमारे हिस्से क्या आया ? ..…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
7 -सारी बंदिशे, नियम, क़ानून, अनुच्छेद और अधिनयम मछुआरों को SC आरक्षण से वंचित करने की साजिश का हिस्सा हैं .…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
8-आज राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और RGI जातीय गुंडागर्दी के अड्डे बने हुए हैं और हमारे विरुद्ध वर्षों से षड्यंत्र स्थल बने हुए हैं .…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
9-मछुआ SC आरक्षण मुद्दों पर 100 से अधिक सांसद संसद भवन में बहस कर हमारे आरक्षण की मजबूत वकालत कर चुके हैं जिनपर आज तक केंद्र की किसी सरकार ने कोई कार्रवाही नहीं की …… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
10- हम केंद्र मैं बैठी सरकार को दिखा देना चाहते हैं कि हम 1950 से SC आरक्षित होते हुए भी आज तक वंचित हैं .…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
11 - हम भारत के आदिनिवासी निषाद है जो मत्स्यपालन, आखेट और शिकार में संलग्न रहे और  धन ,धरती, वन, जल सम्पदा और सत्ता से वंचित कर दिए गए ..…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
12- हम बता देना चाहते हैं कि हम किरायेदार नहीं मकानमालिक हैं .…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
13- SC आरक्षण हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हमारी नस्लों को इससे षड्यंत्र पूर्वक 65 वर्षों से वंचित किया जा रहा है .…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
14 - आजादी के पूर्व के और बाद के सभी ऐतिहासिक और शासकीय दस्तावेजों में हम अछूत, अधम, जीवहत्यारे और पापकर्मा प्रमाणित हैं फिर भी हमारे हिस्से के हक़ पर ठेकेदार जातियाँ कुंडली मारे बैठी हैं और यह सब केंद्र की वोट बैंक की राजनीति के कारण हो रहा है ..…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
15- हम चेताना चाहते है कि हमारी उपेक्षा राजनैतिक दलों को भारी पड़ेगी ....…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
16- हम दिखाना चाहते हैं कि हमारी शक्ति किसी से कम नहीं है ....…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
17 - हम शासन प्रशासन और राजनैतिक भागेदारी के असली उत्तराधिकारी हैं ....…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
18- हम साबित कर देंगे कि सरकारें हमारे वोट से बनती और बिगड़ती हैं …… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
19- हम अपनी जनशक्ति से लोकतंत्र के मंदिर में आहुति देने आएंगे …… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
20- ताकि केंद्र की गूंगी,बहरी और निषादविरोधी सरकार को राम का वायदा और उतराई वसूली याद रहे ....…… इसलिए हम दिल्ली घेरना चाहते हैं।
दिल्ली चलो का नारा देकर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के पैर उखाड़कर भारतीय स्वतन्त्रता का मार्ग प्रशस्त किया था, आज निषादों ने दिल्ली चलो का नारा देकर अपने आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने का मार्ग प्रशस्त किया है । विजय निश्चित हमारी ही होगी ।
दिल्ली चलो!  संसद घेरो !

रविवार, 26 अप्रैल 2015

17 अति पिछड़ी जातियों का प्रस्ताव RGI व NCSC को

उत्तर प्रदेश सरकार की शीर्ष प्राथमिकता एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय मुलायम सिंह यादव की संकल्प बनीं 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल / पर्यायवाची परिभाषित करने हेतु केंद्र की मोदी सरकार ने फरवरी 2015 में बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में मेरे द्वारा पेश किये गए निजी विधेयक पर निर्णय लेते हुए इसे भारत के महारजिस्ट्रार और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की आवश्यक संस्तुति के लिए भेजा हैं । इसके लिए मैं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावर चन्द्र गहलौत एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी का भी हार्दिक आभारी हूँ ।
मानसून सत्र में यह मुद्दा आदरणीय मुलायम सिंह यादव जी ने बड़ी संजीदगी से उठाया था जिस पर कई सदस्यों ने लोकसभा में स्वयं को इस मुद्दे से सम्बद्ध कर इस विषय पर अपना समर्थन भी जताया था । शीतकालीन सत्र में लोकसभा में पुनः श्री धर्मेन्द्र यादव सांसद ने कई सहयोगी सांसदों के सहयोग से यह मुद्दा गरमाया । मैंने शीतकालीन सत्र में इसी आशय का निजी विधेयक रखा था , जो अपेक्षित समर्थन के अभाव में गिर गया । पुनः बजट सत्र में जद यू सांसद डॉ अनिल साहनी के साथ संयुक्त रूप से उत्तर प्रदेश की 17 जातियों के लिए संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जिस पर कार्रवाही हो रही है । 10 अप्रैल 1015 को उत्तर प्रदेश सरकार ने RGI द्वारा पूर्व में की गयी आपत्ति और पूछे गए औचित्य का भी सन्तोजनक जवाब केंद्र को प्रेषित कर दिया है ।
अगले चरण में मैंने निर्णय किया है कि सपा सहित एकीकृत जनता परिवार के सभी सांसदों एवं भाजपा के मछुआ सांसदों को जनभावनाओं से जुड़े इस मुद्दे पर सहमत करके भारत के महारजिस्ट्रार एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन श्री पी एल पूनिया जी से भेंट कर उन्हें संतुष्ट करते हुए इस पर प्रभावी कार्रवाही कराई जाये ।
आप सबकी शुभकामनाओं का आकांक्षी
विशम्भर प्रसाद निषाद
सांसद एवं राष्ट्रीय महासचिव
समाजवादी पार्टी

गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

समाजवाद से बढेगा देश

भाजपा ने उन्माद और नफरत की राजनीति करते हुए देश को तोड़ने और धार्मिक आधार पर बाँटने की साजिश करते हुए पूंजीपतियों को संरक्षण देकर ऐसे  कार्पोरेट कल्चर की शुरुआत की जिसने मीडिया को अपना दलाल बनाकर खेल खेलते हुए देश की जनभावनाओं को सिक्कों और रुपयों से बदलने का काम किया। जबकि कांग्रेस नीत सरकारों ने हमेशा से देश के जनमानस के विपरीत कार्य किया और महंगाई सहित भ्रष्टाचार और गरीबी बढ़ाने वाली योजनायें देश पर लादीं। 
              इसके विपरीत जब जब समाजवादियों को सत्ता मिली ,किसानों के कर्जे माफ़ हुए ,नौजवानों को दिशा मिली और पिछड़ों अतिपिछड़ों और महिलाओं को सम्मान मिला।सरकारी योजनायें जनता की जरूरतों और सहूलियत के हिसाब से बनी और क्रियान्वित हुयीं।
कांग्रेस और भाजपा ने सांठगांठ करते हुए हमेशा समाजवाद का विरोध किया क्योंकि समाजवादी व्यवस्था समाज के अंतिंम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कराहट लाना चाहती है जबकि समाज के ठेकेदार समाज में अशांति फैलाकर बदअमनी और भाईचारे के खिलाफ काम करना चाहते हैं।
संघर्ष हम समाजवादियों का इतिहास रहा है, बलिदान हमारी विरासत रही है और युवा हमारी क्रांति के अग्रदूत रहे हैं । जब जब समाजवादियों ने आव्हान किया देश कि जनता ने अटूट समर्थन देकर समाजवादियों को अपना नीति निर्धारक चुनकर सत्ता की जिम्मेवारी सौंपी और भ्रष्टाचार व् सम्प्रदायवाद के विरुद्ध प्रचंड समर्थन दिया । समाजवादियों ने सदैव समाज विरोधियों का मुकाबला किया है और विजय पाई है।

विश्वम्भर प्रसाद निषाद .
सांसद एवं राष्ट्रीय महासचिव 
समाजवादी पार्टी

रविवार, 10 अगस्त 2014

आईये ! रक्षा का संकल्प लेवें

प्रिय साथियों,
आप सभी को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाये ।
रक्षा संकल्प के इस अवसर पर अगड़े -पिछड़ों की , स्वर्ण -दलितों की , बहुसंख्यक -अल्पसंख्यक की , सम्पन्न -विपन्न की, सशक्त -निःशक्त की, पुरुष -महिलाओं की तथा सभी मिलकर सामाजिक भाईचारे की रक्षा का संकल्प लेवें । यहीं से राष्ट्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा ।

आपका भाई ,
विश्वम्भर प्रसाद निषाद
सांसद एवं राष्ट्रीय महासचिव - समाजवादी पार्टी

सोमवार, 4 अगस्त 2014

समस्त मछुआ जातियों के SC आरक्षण को शीघ्र विधेयक संसद में


उत्तर प्रदेश के मछुआ समुदाय की अनुसूचित जातियों में गोंड तुरैहा मझवार खरबार बेलदार की भाँति इस समुदाय की अन्य जातियों जिनमे कहार ,कश्यप, निषाद, मल्लाह, केवट, बाथम, धीवर, धीमर , बिन्द , माझी , गोड़िया , तुरहा तथा मछुआ को भैयाराम मुंडा बनाम अनिरुद्ध पटार केस AIR 1971 के आलोक में एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समाज कल्याण विभाग के अनुसूचित जाति /जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान लखनऊ के माध्यम से 2003 , 2006 ,2007 तथा 2013 में व्यापक मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण कराकर संस्तुतियों के आधार पर इन जातियों को संविधान संशोधन कराकर धारा 341 (1 ) में जोड़ने विषयक प्राइवेट मेंबर बिल/विधेयक को स्वीकृत किये जाने के सम्बन्ध में आज मैंने राज्यसभा के महासचिव के समक्ष विधेयक प्रस्तुत किया है जिसे उन्होंने परिक्षण आख्या हेतु विधि मंत्रालय को प्रस्तुत कर चालू सत्र अथवा आगामी सत्र में सदन में प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया है ।
जल जंगल और जमीन पर आश्रित इन मछुआ जातियों को बदलते विकास के दौर ने कहीं अधिक पीछे धकेल दिया है जिसकारण इन जातियों को सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक मोर्चे पर उपेक्षा और शून्य के दौर से उबरने के लिए संविधान सम्मत अधिकारों और सुविधाओं के लिए संविधान में अनुमन्य आरक्षित व्यवस्था से सम्बद्ध होना आवश्यक है । विभिन्न आयोग , समितियों और शोध संस्थानों ने इन जातियों के लिए अनुसूचित जाति /जनजाति आरक्षण की सिफारिश की है । अनेक माननीय सांसदों ने समय समय पर इस दिशा में आवाज़ उठाते हुए इन जातियों के आरक्षण के लिए संसद में पुरजोर वकालत की है । 

 आज से ही मैंने अपने विधेयक के समर्थन में साक्ष्य जुटाने आरम्भ कर दिए हैं । मुझे विश्वास है इस पुनीत कर्तव्य में आप सब यथा योग्य अध्ययन सामग्री , साक्ष्य, मुकदमा नज़ीर , अभिलेख आदि मुझे उपलब्ध कराएँगे । हालाँकि इस प्रयत्न में हमारे पास विधि सम्मत पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है किन्तु आप सभी का सहयोग एवं अनुभव भी आवश्यक है |
आपका :
विश्वम्भर प्रसाद निषाद
सांसद एवं राष्ट्रीय महासचिव - समाजवादी पार्टी

शनिवार, 14 जून 2014

सपा नेतृत्व का कोटि कोटि आभार !

प्रिय मित्रों ,
परमआदरणीय नेताजी माननीय मुलायम सिंह यादव जी के आशीर्वाद और प्रो रामगोपाल यादव जी की संस्तुति पर मुझ अकिंचन को राज्यसभा में सांसद बनने का गौरव प्राप्त हुआ । इसके लिए मैं समस्त मछुआ समुदाय की ओर से सपा नेतृत्व का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ ।
विधान सभा चुनाव 2012 हारने के पश्चात मेरी मेहनत पर भरोसा करते हुए पार्टी नेतृत्व ने मुझे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा 2014 का टिकट सौंपा । कार्यकर्ताओं के जी तोड़ परिश्रम और प्रदेश सरकार की लोकप्रिय योजनाओं के बूते हम चुनाव लड़ें लेकिन जनता ने केंद्र में कांग्रेस के दस साला कुशासन का विकल्प भाजपा को चुना और नतीजतन मैं चुनाव हार गया । लेकिन हार के बावजूद भी मैं सपा नेतृत्व के विश्वास को जिताकर ले गया।
मेरा राज्यसभा में चयन इस बात को प्रमाणित करता है कि समाज और जमीन से जुड़े मजबूत कार्यकर्ता की मेहनत की कद्र पार्टी नेतृत्व ने सदैव की है और उसे माननीय मुलायम सिंह यादव जी ने आगे बढ़कर उस कार्यकर्ता को और तराशा है , निखारा है और सम्मानित किया है ।
लोकसभा चुनाव में नेतृत्व विहीन हो चुके मछुआ समुदाय को, जो कि सामाजिक मुख्यधारा में आने के लिए आज भी हाथ पैर मार रहा है , देश की संसद में समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व देकर माननीय मुलायम सिंह जी ने हमें आवाज़ देने का अवसर प्रदान किया है । अब निसंदेह ही हम अपनी 17 अति पिछड़ी जातियों की आवाज़ को संसद में उठाने के लिए दूसरों के मोहताज़ नहीं रहेंगे और अपने SC आरक्षण पर और अधिक प्रखर और मुखर होकर बात रखेंगे। समाजवादी पार्टी अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को संरक्षण देकर उसके चेहरे पर मुस्कान लाने को कटिबद्ध है ।
आप सबकी शुभकामना का सतत आकांक्षी
विशम्भर प्रसाद निषाद
सांसद / राष्ट्रीय महासचिव
समाजवादी पार्टी   

रविवार, 20 अप्रैल 2014

एक ही विकल्प ……समाजवाद !

 
भ्रष्टाचार, महंगाई और निराशा के माहौल में केंद्र की सरकार ने जिस स्थिति में देश को लाकर खड़ा किया है उसके लिए कांग्रेस की नीतियाँ तो जिम्मेवार हैं ही , साथ ही कांग्रेस की चाटुकारिता पूर्ण राजनीति और देश पर अपरिपक्व नेतृत्व थोपने की मंशा भी उत्तर दाई है । राहुल गांधी के बचकाने चरित्र को देश पर लादने की कोशिश और उसके ऐवज में कांग्रेस के जमीनी हकीकत से कोसों दूर जनविरोधी निर्णयों की मार झेलते देश में कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है । आज युवा , किसान, मजदूर, व्यापारी , छात्र , मध्यमवर्ग , और विशेषकर महिलायें केंद्र में बैठी जनविरोधी सरकार के नकारेपन से खिन्न होकर सत्ता परिवर्तन को तैयार खड़े हैं
धार्मिक उन्माद और सम्प्रदायवाद को अपनी पूँजी मानकर चलने वाले जनसंघ की रणनीति इस चुनाव में फ्लॉप साबित हो रही है । भाजपा शासित राज्यों में हाहाकार और मोदी साहब के फर्जी गुजरात मॉडल की पोल चुनाव से पहले ही खुल गयी । अब यह निर्धारित हो चुका है कि भाजपा बहुमत तो दूर…… उसके आसपास भी फटकने वाली नहीं है। देश में कांग्रेस और भाजपा के विरुद्ध व्यापक स्तर पर माहौल तैयार हो चुका है।
लोकसभा चुनाव बाद समाजवादियों पर बड़ी जिम्मेवारी आने वाली है । आज देश अपना रास्ता समाजवादी विचारधारा में तलाश रहा है । आज समाजवाद राष्ट्र की मजबूरी नहीं .... जरूरत है । अपने घोषणापत्र को दो साल में लागू करके दिखाने वाला उप्र देश का पहला राज्य है । अपने वादे और इरादे पर खरे उतरने वाले समाजवादियों से देशवासियों की अपेक्षाएं यूँ ही नहीं हैं ।

समाजवादियों पर है देश बचाने की जिम्मेवारी

भारत में समाजवाद के प्रवर्तक श्रद्धेय लोहिया जी ने बहुत पहले ही कह दिया था कि समाजवाद ही कांग्रेस द्वारा  पोषित देश की समस्त समस्याओं का एकमेव समाधान है । भारतवासी जिस दिन कांग्रेसवाद और कट्टरवाद की प्रतीक जनसंघी विचारधारा को ठुकरा देंगे उसी दिन समाजवादियों पर देश बचाने  की जिम्मेवारी आ जाएगी  ।
डॉ लोहिया जब तक जीवित रहे गैर कांग्रेस वाद को बढ़ावा देकर जनसंघ की उन्मादी शक्तियों को ललकारते रहे ।  आपने कहा था कि लोग मेरी कीमत मेरे मरने के बाद समझेंगे । लोहिया जी के जाने के बाद ही देश को प्रथम समाजवादी सरकार मिली ।
आज पुनः देश कांग्रेस और भाजपा से मुक्ति के लिए समाजवादियों की ओर निहार रहा हैं ।संघर्ष हम समाजवादियों का इतिहास रहा है, बलिदान हमारी विरासत रही है और युवा हमारी क्रांति के अग्रदूत रहे हैं । जब जब समाजवादियों ने आव्हान किया देश कि जनता ने अटूट समर्थन देकर समाजवादियों को अपना नीति निर्धारक चुनकर सत्ता की जिम्मेवारी सौंपी और भ्रष्टाचार व् सम्प्रदायवाद के विरुद्ध प्रचंड समर्थन दिया ।
महंगाई और लूट से त्रस्त आज देश चौराहे पर खड़ा है और प्रत्येक भारतवासी कांग्रेस की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध कमर कस चुका है । संस्कृति और राष्ट्रवाद की झूठी दुहाई देकर देश में उन्मादी राजनीति के माध्यम से नियोजित भ्रष्टाचार , छद्म राष्ट्रवाद , अलगाववाद , नक्सलवाद ,जातिवाद और  नफ़रत का वातावरण फैलाने वाली भाजपा की असलियत सबके सामने है ।
समाजवादी विचारधारा के लोग चुनौतियों से न कभी पहले घबराये …न विचलित हुए और न ही संघर्ष पथ से किसी सूरत डिगे । देश बचाने की जिम्मेवारी जनता ने समाजवादियों को सौंप दी है और हमारे नेता आदरणीय मुलायम सिंह यादव ने इसे चुनौती पूर्वक स्वीकार किया है । जनता के  कांग्रेस और भाजपा से मुक्ति के इस आंदोलन में हम समाजवाद के सिपाही अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार बैठे हैं ।

शुक्रवार, 21 मार्च 2014

निडर होकर कहें अपनी बात

अगर हमारे पास कोई अच्छा विचार है जो बिखरे हुए समाज को जोड़ने में सहायक हो सकता है तो उसे अवश्य व्यक्त करना चाहिए । विचारों से ही व्यक्ति का व्यक्तित्व परिलक्षित होता है । जिस समाज में लेखक / वक्ता नहीं होते वह समाज गूंगा माना जाता है । मौन रहकर अपनी पीड़ा को सहन करना ही उसकी नियति बनजाती हैं । विचार से संकल्प बनता है और संकल्पों से सिद्धांत प्रतिपादित होते हैं । सिद्धांतों से आदर्श स्थापित होते हैं और उच्च आदर्शों से ही सामाजिक परिवर्तन संभव होता है । इसलिए बिना विचार के सामाजिक परिवर्तन की कल्पना निरर्थक है ।
वास्तव में हमारे समाज की फूट और एकता में विफलता का कारण
त्वरित लाभ हैं ……हम त्वरित लाभ चाहते हैं । विचारों का शोधन किये बिना ही हम एक दम समर्थन का सपना देखने लगते हैं , इसके विपरीत जमीनी स्तर पर हम और हमारा व्यक्तित्व कहीं नहीं होता । हम दूसरों पर आसानी से दोषारोपण कर देते हैं जबकि उसके परिश्रम का मोल या तो जानते नहीं या जानना नहीं चाहते ।
सिद्धांत और आदर्श स्थापित करने में जीवन गुजर जाता है । हम बिना सिद्धांतों पर चले आदर्शवाद की खाल ओढना चाहते हैं ।
हर व्यक्ति के सोचने का एक अलग नजरिया होता है । इसमें उसके आसपास के समाज,शिक्षा,संस्कार, कामधंधे ,आजीविका की स्पष्ट छाप होती है । किसान , मजदूर ,व्यापारी , छात्र , नेता आदि सबकी सोच अलग अलग होती है । देश में लोकतान्त्रिक प्रणाली है । कुछ लोग राजनैतिक नजरिये से भी अपनी सोच रखते हैं । राजनीतिक सोच बुरी हो ,ऐसा हर वक़्त नहीं होता । कुछ लोग हर बात को राजनैतिक नजरिये से ही देखते हैं ,तो कुछ राजनीति को ही बुरे नजरिये से देखते हैं।

अपनी बात मनवाने का सबसे बढ़िया उपाय है अपनी कही बात को अपने ऊपर लागू करके दिखाना । जो प्रत्यक्ष दिखेगा और जिसका प्रभाव लोगों को चमत्कृत कर देगा उसे कोई भी सहर्ष स्वीकार करना चाहेगा अन्यथा की स्थिति में बात केवल बात बनकर रह जाएगी, इसलिए हमें पहले विकल्प सुझाना होगा और उदाहरण बनना होगा ....…… समाज तभी स्वीकार करेगा ।

रविवार, 22 सितंबर 2013

मोहन बाबू नहीं रहे !

मोहन बाबू नहीं रहे !

हम सबके प्रिय और समाजवादी पार्टी के आधार स्तम्भ मोहन बाबू का 2014 के निर्णायक मोड़ पर चले जाना विचलित करने वाला है । समाजवादी पार्टी में मोहन बाबू की हैसियत किसी से छिपी नहीं रही । नेता जी के सर्वाधिक प्रिय और विश्वस्त मोहन सिंह जी समाजवाद के अग्रणी अलमबरदार तो थे ही , गैर बराबरी से सतत लड़ने का जो माद्दा आप में था ,वो निसंदेह प्रेरणा दायी है । पिछली कई बैठकों और अधिवेशनों की तरह इस दफा आगरा में मुझे उम्मीद थी कि आपके सानिध्य में कुछ क्षण सौभाग्यस्वरूप मिलते , लेकिन आपका गंभीर स्वास्थ्य अनहोनी जता गया । आप गिरते स्वास्थ्य कारणों से आगरा न आ सके ।

समाजवाद के सिपाही कदम दर कदम अपने पदचिन्ह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा संकेत बन छोड़ जाते हैं । डॉ लोहिया की श्रंखला में श्रद्धेय मधु लिमये, जनेश्वर मिश्र , ब्रजभूषण तिवारी के बाद मोहन बाबू समाजवाद के नए प्रवक्ता बन उभरे और अपना दर्शन समाजवाद के अनुयायियों के लिए संघर्ष करने के लिए छोड़ गए । आपका जीवन हमारे लिए प्रेरणा दायक है । आपका चरित्र और चिंतन समाजवादियों का हौसला है ।

शत शत नमन ।

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

प्रिय सजातीय मित्रो,
सुप्रभात । आशा है आप सानन्द होंगे ।
समाजवादी पार्ट 11 एवं 12 सितम्बर को आगरा में अपना राष्ट्रीय अधिवेशन करने जा रही है । लोकतान्त्रिक व्यवस्था में राजनैतिक दलों के सम्मलेन , कार्यशालाएं और अधिवेशन होते रहते हैं । लेकिन हमारे लिए यह महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि इनके चिंतन में हमारे लिए क्या चल रहा है और हमारे सामाजिक सरोकारों से इन्हें कितना लगाव है । 1998 में समाजवादी पार्टी से जुड़ने के बाद से प्रायः सभी सभी सम्मेलनों और अधिवेशन में मैं स्वयं व्यक्तिगत प्रयासों से मछुआ हितों की आवाज़ राजनैतिक आर्थिक प्रस्तावो के जरिये उठता रहां हूँ और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व ने भी हमारे हितों को अपने एजेंडे में शामिल कर हमसे भावनात्मक रूप से जुड़ने का प्रयास किया है ।
इस दफ्फ भी आगरा में मेरा प्रयास रहेगा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने सम्बन्धी प्रस्ताव पर केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति से सीधे मंजूरी दिलाने हेतु सपा नेतृत्व को अपनी भावनाओं से अवगत कराऊँ । चुनावी बेला में यह काम ज्यादा मुश्किल नहीं , क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार तो अपना काम कर चुकी । वोटों का नफ़ा नुक्सान सिर्फ कांग्रेस को समझना है क्योकि यह उसके लिए अंतिम मौका होगा ।
मैं 10 सितम्बर की मध्य
रात्रि से 12 सितम्बर की मध्य रात्रि तक आगरा प्रवास पर रहूँगा । आप लोग सुविधानुसार भेंट करना चाहें तो स्वागत है । संपर्क सूत्र - 9415083132
आपका शुभाकांक्षी
विश्वम्भर प्रसाद निषाद .
समाजवादी पार्टी प्रत्याशी - हमीरपुर महोबा तिंदवारी लोकसभा क्षेत्र ,
पूर्व मंत्री ,उo प्र o शासन

गुरुवार, 25 जुलाई 2013

कमज़ोर, वंचित एवं उपेक्षित मछुआ समुदाय की मसीहा बहन वीरांगना फूलन देवी, सांसद  को 12 वीं पुण्य तिथि पर शत-शत नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि |
मछुआ समुदाय आपके संघर्ष से प्रेरित हो कर अपने सामाजिक , शैक्षिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक विकास की दिशा में आपके मार्गदर्शी सुझावों पर कार्य करता रहेगा और मछुआ आरक्षण के आपके अधूरे सपने को साकार करने के लिए अपने प्राण-प्रण से जुटा रहेगा | सामाजिक क्रांति के इस अंतिम मोर्चे पर आपका अभाव निःसंदेह पीड़ा दायक तो है किन्तु आपकी संघर्ष गाथा हमारे लिए ऊर्जा स्रोत बनकर सामने भी है |
               मछुआ समुदाय आपके सुझाये मार्ग पर चलने को संकल्परत है |

सोमवार, 15 जुलाई 2013

बसपा के समाज तोड़ो अभियान पर लगा पलीता !

आदरणीय मायावती बैचैन हैं ....पेटदर्द शुरू हो गया है । .कहते हैं बरसात में उल्टा सीधा खा लो .....तो अजीर्ण होना लाजिमी हैं ..यहाँ तो पूरा समाज ही जातीय आधार पर चबा डालने की मंशा लिए बैठी बसपा प्रमुख सन्न रह गयी है । इसे करारा झटका माना जा रहा है ।
हालिया हाईकोर्ट द्वारा राजनैतिक दलों के जातीय सम्मेलनों एवं कार्यक्रमों पर संज्ञान लेकर रोक लगाना स्वागत योग्य एवं सराहनीय है । निसंदेह इसके पीछे राजनैतिक दलों द्वारा समाज को जातीय आधार पर विभाजित कर कर वोट बैंक की गन्दी राजनीति को झटका लगेगा और जातीय उन्माद की ओर बढ़ रहे समाज में खुशहाली और भाई चारा बढ़ेगा ।
सब जानते हैं कि राजनीति में बसपा के उभार से समाज में जातिवादी राजनीति और कमेटियों की बाढ़ सी आ गयी । बसपा और उसकी प्रमुख ने घटिया सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर जातियों की कमेटियां खड़ी कर दी ...जैसे में कुर्मी समाज भाईचारा कमेटी , ब्राह्मण समाज भाईचारा कमेटी ,क्षत्रिय समाज भाईचारा कमेटी,बनिया समाज भाईचारा कमेटी , पाल समाज भाईचारा कमेटी सैनी समाज भाईचारा कमेटी,गुर्जर समाज भाईचारा कमेटी ,कश्यप समाज भाईचारा कमेटी, लोहार समाज भाईचारा कमेटी ,ठठेरे समाज भाईचारा कमेटी ,जाट समाज भाईचारा कमेटी ,यादव समाज भाईचारा कमेटी वगैरह वगैरह ........।
इन कमेटियों के गठन से समाज में नफरत और वैमनस्य की खाई चौड़ी हो रही थी वहीँ ये कमेटियों बसपा के लिए अवैध धन वसूली का जरिया बनी हुयीं थी । हर छुट भैय्ये को भाईचारा कमिटी का नेता बनाकर बसपा राजनीति का अपराधीकरण करने में जुटी थी वहीँ तथाकथित भाईचारा कमिटी वाले चोरी और बलात्कार जैसे संगीन अपराधों में शामिल निकले । यानी जिस पर भाई चारा बनाने की जिम्मेवारी दी गयी वही समाज को तोड़ने में जुट गया ।
समाजवादी पार्टी डॉ लोहिया के जाति तोड़ो -समाज जोड़ो के विचार पर गठित पार्टी है और जातिवाद को देश व् समाज के लिए बुराई मानती हैं । डॉ लोहिया ने समाज को जोड़ने के लिए अंतरजातीय विवाह और रोटी बेटी के संबंधो पर जोर देने की वकालत करते हुए सामाजिक तानेबाने को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और सबसे पहले पिछड़ों के "अजगर" समूह यानि अहीर ,जाट ,गुर्जर और राजपूत जातियों को गोत्र और जाति भेद मिटाते हुए एक होने का अहसास कराया । बाद में यही गठजोड़ राजनैतिक शक्ति में परिवर्तित होता गया और पिछड़े  राजनीति में जड़ पकड़ते चले गए । लोध…मल्लाह सहित सैनी ,शक्य,मोर्य ,कुशवाहा, माली, फूलमाली जातियां भी गोत्र्वाद और जातिभेद का नाम भूलकर डॉ लोहिया के आह्वान पर एक हो गयी और डॉ लोहिया के अरमानों का समाजवाद परवान चढ़ने लगा ।

निसंदेह अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए समाज को गोत्र में बांटने वाली बसपा इस निर्णय से बौखलाई हुयी हैं ...क्योंकि अभी अभी वह ब्राह्मण सम्मलेन करके निबटी हैं .....फिलहाल हाईकोर्ट के निर्णय ने बसपा के समाज तोड़ो अभियान पर पलीता लगा  दिया है

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

......वर्ना लोहिया वाहिनी अपने अंदाज में निबटेगी

सठियाये ,थके हारे और दिमागी दिवालिया पन का अंतिम दौर झेल रहे बेनी बाबू हद किये डाल रहे हैं ।  किसी भी पार्टी की आलोचना राजनीति में स्वस्थ मानी जाती है ।  आलोचनाओं का सहर्ष स्वागत होता है ..किया भी जाना चाहिए । लेकिन जो काम बेनी बाबू अखबार और टीवी के जरिये कर रहे हैं वो राजनैतिक स्वस्थ मानदंडों के अनुरूप कदापि नहीं माना जा सकता । इसे आलोचना नहीं ..गाली गलौज की श्रेणी में रखा जा सकता और आपत्ति जनक है । जाहिर है वे ऐसा करके कांग्रेस और अपने लिए ही संकट खड़े कर रहे हैं । कांग्रेस के मैनेजरों ने उन्हें औकात में रहने की सलाह भी दी हैं । एक केन्द्रीय मंत्री के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या होगा कि कांग्रेस संघठन के ऐसे लोग जो उनके सामने कुछ भी नहीं है ...उन्हें डांट पिला रहे हैं । बेनी बाबू में अगर शर्म  है तो कांग्रेस से इस्तीफ़ा दें दें । वे कहते घूम रहे हैं कि कांग्रेस उन्हें बोलने से रोकेगी तो इस्तीफ़ा दे देंगे .....कांग्रेस तो रोक रही है ...स्टेट इंचार्ज चेतावनी दे रहे है ..बेशर्म बेनी कांग्रेस में बने हुए हैं ।

जहाँ तक आदरणीय नेता जी का सवाल है तो मुलायम सिंह जी ने हमेशा उसूलों की राजनीति की है और मान सम्मान के साथ की है । अपने सिद्धांतों के लिए अपनी सरकार तक कुर्बान की है ...लेकिन अपने वायदों से पीछे नहीं हटे । नेता जी का बड़प्पन देखिये ...आलोचनाओं को अपनी शक्ति मानने वाले नेताजी ने बेनी के बयान को आज की प्रेस कांफ्रेंस में यह कहकर टाल दिया कि " मेरा साथी मेरी चर्चा कर रहा है "।

मेरी राय है चुनाव सामने हैं बेनी बाबू अपनी सीट बचाएं और फालतू बकबास बंद करते हुए सीमा लांघने की कुचेष्टा न करें ......वर्ना लोहिया वाहिनी अपने अंदाज में सड़कों पर निबटेगी