शनिवार, 16 मार्च 2013

निडर होकर कहें अपनी बात


अगर हमारे पास कोई अच्छा विचार है जो बिखरे हुए समाज को जोड़ने में सहायक हो सकता है तो उसे अवश्य व्यक्त करना चाहिए । विचारों से ही व्यक्ति का व्यक्तित्व परिलक्षित होता है । जिस समाज में लेखक / वक्ता नहीं होते वह समाज गूंगा माना जाता है । मौन रहकर अपनी पीड़ा को सहन करना ही उसकी नियति बनजाती हैं । विचार से संकल्प बनता है और संकल्पों से सिद्धांत प्रतिपादित होते हैं । सिद्धांतों से आदर्श स्थापित होते हैं और उच्च आदर्शों से ही सामाजिक परिवर्तन संभव होता है । इसलिए बिना विचार के सामाजिक परिवर्तन की कल्पना निरर्थक है । वास्तव में हमारी असफलता का कारण ये हैं कि हम त्वरित लाभ चाहते हैं । विचारों का शोधन किये बिना ही एक दम समर्थन का सपना देखने लगते हैं इसके विपरीत जमीनी स्तर पर हम और हमारा व्यक्तित्व कहीं नहीं होता । हम दूसरों पर आसानी से दोषारोपण कर देते हैं जबकि उसके परिश्रम का मोल या तो जानते नहीं या जानना नहीं चाहते ।सिद्धांत और आदर्श स्थापित करने में जीवन गुजर जाता है । हम बिना सिद्धांतों पर चले आदर्शवाद की खाल ओढना चाहते हैं ।
हर व्यक्ति के सोचने का एक अलग नजरिया होता है । इसमें उसके आसपास के समाज,शिक्षा,संस्कार, कामधंधे ,आजीविका की स्पष्ट छाप होती है । किसान , मजदूर ,लाला , छात्र , नेता आदि सबकी सोच अलग अलग होती है । देश में लोकतान्त्रिक प्रणाली है कुछलोग राजनैतिक नजरिये से भी अपनी सोच रखते हैं । राजनीतिक सोच बुरी हो ,ऐसा हर वक़्त नहीं होता । कुछ लोग हर बात को राजनैतिक नजरिये से ही देखते हैं ,तो कुछ राजनीति को ही बुरे नजरिये से देखते हैं।
अपनी बात मनवाने का सबसे बढ़िया उपाय है अपनी कही बात को अपने ऊपर लागू करके दिखाना । जो प्रत्यक्ष दिखेगा और जिसका प्रभाव लोगों को चमत्कृत कर देगा उसे कोई भी सहर्ष स्वीकार करना चाहेगा अन्यथा की स्थिति में बात केवल बात बनकर रह जाएगी, इसलिए हमें पहले विकल्प सुझाना होगा और उदाहरण बनना होगा .... समाज तभी स्वीकार करेगा ।

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

निर्माण ,प्रगति और उपलब्धियों भरा एक साल

और आज समाजवादी सरकार को एक साल हो गया । विपक्ष ने अखबारों के कोने में अपनी प्रतिक्रिया देकर औपचारिकता पूर्ण की । लेकिन असली प्रतिक्रिया और चर्चा जनता में है । आमजन प्रदेश को विकास और तकनीक के सातवें आसमान की उंचाई पर लेजाने वाले युवा नेतृत्व से न केवल संतुष्ट और प्रसन्न हैं बल्कि उसको और मौका देने के मूड में हैं । लोग विकास के नए आयाम को समझ रहे हैं । लोग विकास की नई परिभाषा के अर्थों को जान रहे हैं और जनता में समाजवादी सरकार के सुलझे कार्यक्रम पहुँचने से लोगों में नई आशा और विश्वास का माहौल पैदा हुआ है ।

समाज के हर वर्ग में कुछ न कुछ अवश्य हासिल होने का संतोष है तो सबसे ज्यादा आशान्वित युवा वर्ग है जो सीधे सीधे सरकार के नेतृत्व से भावनात्मक रूप से जुड़ गया है । ये चमत्कार कोई यकायक नहीं हुआ बल्कि इसके लिए सपा के रणनीतिकारों ने वर्षों मेहनत और अनथक प्रयास किये है । युवाओं  के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी का हमेशा से ही स्पष्ट मानना रहा है कि युवा को संसाधन मुहैया करा दियें जाएँ तो युवा अपना रास्ता और भविष्य स्वयं सभालने का जज्बा रखते हैं । इस एक वर्ष में दलितों, पिछड़ों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों , व्यापारियों, बुनकरों ,मछुआरों और युवाओं का विशेष ख्याल करते हुए सरकार ने अपने घोषणा पत्र में उल्लिखित विधान सभा चुनाव 2012 की हर लाइन को पूरा करने का प्रयास किया है ।
यकीनन समाज के हर तबके में खुशहाली हैं और जनता अब लोकसभा चुनाव में समाजवादी सरकार को और खुलकर मौका देना चाहती हैं । जनमत करवट ले रहा है जो पीछे छूट चुके हैं संभवतः वे मुद्दा विहीन हो कर रह गए हैं । इसीलिए अब प्रदेश में सीधी लड़ाई विकास बनाम साम्प्रदायिक ताकतों से है यानि समाजवादियों का अब मुकाबला आमने सामने से विघटनकारी भाजपा से है जिसमे लाल सेना नायकों की बढ़त स्पष्ट दिखती है । 

रविवार, 10 मार्च 2013

सपने हुए साकार : गरीब छात्र करेंगे डिजिटल तकनीक प्रयोग

प्रदेश के नौजवानों को उच्च शिक्षित और हाई टैक्नोलोजी से जोड़ने का बहु प्रतीक्षित सपना कल पूरा होने जा रहा है । यशस्वी मुख्यमंत्री के निर्देशन में समाजवादी सरकार अपने चुनाव घोषणापत्र  2012 का सबसे लोकप्रिय और मजबूत वादा पूरा करने जा रही है । कल लखनऊ के कैल्विन ताल्लुकेदार कालेज मैदान में प्रदेश के इंटरमीडिएट उत्तीर्ण 10000 छात्रो को लैपटाप वितरित होंगे।
जनता से किये वादों की कल कड़ी और भी अधिक मजबूत होने जा रही है । शीघ्र पूरे प्रदेश के 15 लाख छात्रो के हाथो में चमचमाता लैपटाप होगा । आशाओं और विश्वास का समंदर कल लखनऊ में और भी हिलोरें मारेगा जब भविष्य के भावी कर्णधार नई डिजिटल तकनीक से रूबरू होंगे और उसका इस्तेमाल कर ज्ञान क्षेत्र का विस्तार करेंगे ।
सच है मगर सपना नहीं है , कल तक बेशक सपना ही था । कई गरीब छात्रों के लिए लैपटाप सपना ही था लेकिन कोटि कोटि धन्यवाद है समाजवादी सरकार के मुख्यमंत्री जी को , जिन्होंने असंभव सी लग रही इस योजना को लागू कर के दिखाया । विरोधी हमेशा से ही मुख्यमंत्री जी की इस महत्वकांक्षी योजना के प्रत्यक्षतः आलोचक रहे , लेकिन परोक्ष रूप से दबे मुंह प्रसंशा भी कर रहे हैं ।
 समाजवादियों की आरम्भ से ही नीति रही है कि  बेरोजगार और बेकार ठहरा दिए नौजवानों के अन्दर सुषुप्त उर्जा को यदि सम्मान देकर देश हित में लगा दिया जाये तो देश को नौजवानों का प्रगतिशील नेतृत्व तो मिलेगा ही देश को नवीन उर्जायुक्त दिशा भी मिलेगी । इसीलिए समाजवादी पार्टी का सदैव विचार रहा है कि नौजवान नीति बनाकर युवाओं में विश्वास और आशा का माहौल बनाकर रोजगार के उचित अवसर सृजित करते हुए खुशहाल वातावरण बनाएं । देश का नौजवान अगर स्वस्थ और प्रसन्नचित है तभी नव निर्माण की ओर अग्रसर होगा । समाजवादी पार्टी युवाओं के इस मिजाज़ को भलीभाँति समझती है ।
श्री मुलायम सिंह यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट बनी इस योजना का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कल से लैपटाप वितरित कर शुरुआत करेंगे।

मंगलवार, 27 नवंबर 2012

सपा ने ली शुरूआती बढ़त , उतारे योद्धा मैदान में


समाजवादी पार्टी की 2014 लोकसभा चुनाव की पहली सूची जिसमे 63 सीटो के प्रत्याशियों के नाम हैं , इस प्रकार है :

1.मैनपुरी -मुलायम सिंह यादव
2. कैराना - नाहिद हसन
3. मुजफ्फरनगर - गौरव स्वरूप
4. नगीना - यशवीर सिंह
5. मुरादाबाद - डॉ. ST हसन
6. अमरोहा - श्रीमती हुम्मेरा अख्तर
7. बागपत - डॉ. विजय कुमार
8. गाजियाबाद - सुधन चन्द्र रावत
9. गौतमबुद्ध नगर- नरेंद्र भाटी
10. हाथरस - रामजी लाल सुमन
11. मथुरा - चंदन सिंह
12. आगरा - महाराज सिंह धनगर 
13. फतेहपुर सीकरी - डॉ. राजेन्द्र सिंह
14. फिरोजाबाद - अक्षय यादव
15. एटा - कुंवर देवेंन्द्र सिंह यादव
16. बदायूं -धर्मेंद्र यादव
17. आंवला- कुंवर सर्वराज सिंह
18. पीलीभीत - बुधसेन वर्मा
19. शाहजहाँपुर -मिथलेश कुमार
20. खीरी - रविप्रकाश वर्मा
21. धौरहरा - आनंद भदौरिया
22. हरदोई - उषा वर्मा
23. मिश्रिख - जय प्रकाश रावत
24. उन्नाव - अरुणा शंकर शुक्ला
25. मोहनलालगंज - सुशीला सरोज
26. लखनऊ - अशोक बाजपेयी
27. सुल्तानपुर - शकील अहमद
28. प्रतापगढ़ - C .N. सिंह
29. इटावा - प्रेमदास कठेरिया
30. कन्नौज - डिंपल यादव
31. अकबरपुर - लाल सिंह तोमर
32. जालौन - घनश्याम अनुरागी
33. झांसी - चंद्रपाल सिंह यादव
34. हमीरपुर - विशम्भर प्रसाद निषाद
35. बांदा - श्यामा चरण गुप्ता
36. फतेहपुर - राकेश सचान
37. कौशाम्बी - शैलेंद्र कुमार
38. इलाहाबाद - रेवती रमन सिंह
39. बाराबंकी - राजरानी रावत
40. फैजाबाद - तिलकराम वर्मा
41. बहराइच - शब्बीर अहमद बाल्मीकि
42. कैसरगंज - बृजभूषण सरन सिंह
43. गोंडा - कीर्तिवर्धन सिंह
44. डुमरियागंज - माता प्रसाद पांडेय
45. बस्ती - बृज किशोर सिंह
46. गोरखपुर - राजमती निषाद
47. लालगंज - दूधनाथ सरोज
48. घोसी - बालकिशन चौहान
49. बलिया - नीरज शेखर
50. जौनपुर - केपी यादव
51. मछली शहर - तूफानी सरोज
52. चंदौली - राम किशुन
53. वाराणसी - सुरेन्द्र सिंह पटेल
54. भदोही - सीमा मिश्रा
55.राबर्ट्सगंज - पकौड़ी लाल कोल
56 . मेरठ - शाहिद मंजूर
57 .बुलंदशहर सुरक्षित - रवि गौतम
58 . अलीगढ - काजल शर्मा
59 . सीतापुर - महेंद्र वर्मा
60 . फूलपुर - धर्मराज पटेल
61 . महाराजगंज - कुंवर अखिलेश सिंह
62 . आज़मगढ़ - बलराम यादव
63 . गाजीपुर - ओम प्रकाश सिंह

आपका शुभाकांक्षी :-
आपका भाई
विश्वम्भर प्रसाद निषाद ,
राष्ट्रीय महासचिव, समाजवादी पार्टी,
सपा प्रत्याशी  हमीरपुर -महोबा -तिंदवारी लोकसभा क्षेत्र 

रविवार, 18 नवंबर 2012

हार्दिक आभार माननीय नेताजी , शत शत धन्यवाद समाजवादी पार्टी

प्रिय मित्रों ,
आप सब की शुभकामनाओं , आदरणीय नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव जी के आशीर्वाद एवं प्रोफ़ेसर रामगोपाल यादव जी  की अनुशंसा पर मुझे पार्टी ने हमीरपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया है । हार्दिक आभारी हूँ समाजवादी पार्टी पार्लियामेंट्री बोर्ड का ,जिसने लोकसभा हेतु मेरी प्रत्याशिता निर्धारित की । कोटि कोटि धन्यवाद राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह जी का , जिन्होंने मुझ नाचीज पर विधानसभा चुनाव 2012 में पराजित होने के बावजूद भी अटूट विश्वास बनाये रखा ।
आप सब की शुभ कामनाओं का आकांक्षी :-
आपका भाई
विश्वम्भर प्रसाद निषाद . पूर्व मंत्री ,उo प्र o शासन
राष्ट्रीय महासचिव, समाजवादी पार्टी एवं प्रभारी मध्य प्रदेश राज्य समाजवादी पार्टी

क्या बाल ठाकरे सचमुच नहीं रहे ?

बाल ठाकरे नहीं रहे । कल उनके महाप्राण महायात्रा को निकल पड़े । आज उनका नश्वर शरीर भी पंचतत्व में विलीन हो जाएगा । बेशक ठाकरे के रहने या न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योकि उनकी सोच अब भी जिन्दा है । ठाकरेवाद भारतीय राजनीति का ऐसा दुर्भाग्य पूर्ण पहलू हो गया है जो राजनीति में तडके या आइटम सॉन्ग का काम करता है और उन्मादी राजनीति करने वालों के लिए घृत संजीवनी है । भले ठाकरे आज नहीं है लेकिन ठाकरी सोच आज भी सर ताने खड़ी है जो भारतीय लोकतंत्र में अप्रासंगिक हो चुके गुण्डातंत्र को संरक्षित करती है और जबरदस्ती डंडे के बल पर अपनी बात मनवाने की पक्षधर है । क्षेत्रवाद में पिरोये छद्म राष्ट्रवाद और उससे उपजे मनमाने आचरण को लोकतान्त्रिक राजनीति में लाने का श्रेय बाल ठाकरे ही ले सकते हैं। ठाकरे की इसी ठसक का एहसास अमिताभ बच्चन से लेकर जावेद मियाँदाद तक ने किया था । भाषावाद और प्रांतवाद की चाशनी में लपेट कर बाल ठाकरे ने ऐसा छद्म राष्ट्रवाद परवान चढ़ाया जो दूसरों को देश द्रोही ही समझता रहा और जो एक सभ्य शहरी को मुंबई में जीने के लिए भाई मार्का किसी गली मुहल्ले के गुंडे टाइप नेता के सर्टिफिकेट की आवश्यकता पर बल देता था । अपने ही देश में पराये देश का अनुभव करा देने वाली ठाकरी सोच की मार कभी गरीब मजदूरों पर पड़ी तो कभी दक्षिण भारतीयों पर , कभी गुजरातियों पर तो कभी यूपी बिहार के मेहनतकश तबके को कूड़ा करकट और गंदगी का ढेर बता कर पड़ी । जबकि भारत माता की जय बोल कर रातोंरात दाम दोगुने चौगुना कर देने वाले जमाखोर और जय महाराष्ट्र कहकर उत्तर भारतीयों के गाल लाल कर देने वाले बाल ठाकरी सोच के सबसे बड़े पोषक और संरक्षक रहे । आज ठाकरे के जाने से वे लोग अपने आप को अनाथ महसूस कर रहे हैं , मेरी सदभावनाएँ उनके साथ हैं ।  बेशक डंडा ठोकू  शैली के आधार पर उभरे और टिके रहे बाल ठाकरे और उनकी सोच को आम महाराष्ट्रियन ने कभी बहुमत नहीं दिया जो प्रमाणित करता है कि भारतीय जनमानस आज भी बाल ठाकरे की सोच से इतर शांति, सद्वभाव और प्रेम चाहता है,  टकराव नहीं ।
श्रद्धांजलि ........................... R .I .P.

रविवार, 7 अक्टूबर 2012

मछुआ वीरों से आह्वान

मछुआ वीरों से आह्वान
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भूल चुके तुम आज निषादों, वेदव्यास से ज्ञानी को ।
भूल चुके तुम आज लग रहा, फूलन की कुर्बानी को ।।
भुला दिया है तुमने तिलका मांझी से
बलिदानी को ।
भूल चुके तुम आज लग रहा दशरथ स्वाभिमानी को ।।
भूल गए तुम प्रेम शबरी का, जिद पर अड़ना भूल गए ।
भूल गए तुम संघर्षों को, हक पर मिटना भूल गए ।।
महापराक्रमी रानी दुर्गा की ललकारें भूल गए ।।
सदा शत्रुशोणितरंजित प्यासी तलवारें भूल गए ।।

गौरव तुमने भुला दिया है गुह्यराज की भक्ति का
तुमको बिल्कुल मान नहीं है कालूदेव की शक्ति का
भूल गये तुम आज जवानों, हिम्मत सिंह की हिम्मत को ।
और भुला बैठे तुम नत्था केवट जी की ताक़त को ।।
भूल गए इतिहास स्वयं का, विस्मृत किया कथाओं को ।
जिनमें पौरुष वर्णित था, ऐसी कुछ परिभाषाओं को ।।
भूल गए तुम अपने लोगों की टूटी आशाओं को ।
भुला दियें हैं स्वप्न कई , भूले कुछ अभिलाषाओं को ।।
जमुना और जयपाल स्वर्ग में बैठ भला क्या सोचेंगे ।
एकलव्य के वंशज रण से उलटे पैरों लौटेंगे ?

अब ये तुम पर रहा जवानों कैसा धर्म निभाओगे ।
जो स्वर्णिम इतिहास रहा तुम उसको वापस लाओगे ।।
या फिर अपने अधिकारों की होली जलते देखोगे ।
आरक्षण की मांग पुरानी , कब तक टलते देखोगे  ।।
आओ ! हम सब मिलकर यदि अपनी आवाज़ उठाएंगे ।
हम विकास की दौड़ में सब से आगे खुद को पायेंगे ।।
आभार :-अरुण कुमार तुरैहा